गधा और उसके दो मालिक
एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक गधा रहता था। वह गधा बहुत ही मेहनती और ईमानदार था। अपने मालिक के कामों को वह पूरी निष्ठा से करता था और कभी कोई शिकायत नहीं करता था। गधा हमेशा सुबह-सुबह उठकर मालिक का सामान ढोता और गांव भर में मेहनत करता था। गधे की यही मेहनत और ईमानदारी उसके मालिक को बहुत पसंद थी, और इसलिए वह गधे से बहुत खुश रहता था।
एक दिन गधे के मालिक को एक दूसरे गांव में काम करने का मौका मिला। वहां उसका एक और मित्र रहता था, जो कि खेती का काम करता था और उसे भी एक गधे की आवश्यकता थी। पहले मालिक ने सोचा कि वह गधे को अपने मित्र के साथ बांट सकता है, ताकि गधा दोनों के लिए काम कर सके और दोनों का फायदा हो जाए। उसने अपने मित्र से कहा, “तुम्हारे पास भी अब से मेरा गधा रहेगा, और तुम भी इसका उपयोग कर सकते हो।”

अब गधा दोनों मालिकों की सेवा करने लगा। जब वह पहले मालिक के घर पर होता, तो वह सारा दिन उसकी जरूरतों को पूरा करता, भारी सामान उठाता, और खेत में काम करता। फिर जब उसका काम खत्म हो जाता, तो दूसरा मालिक उसे अपने घर ले जाता और उससे अपने काम कराता। गधा दिन-रात बिना रुके काम करता रहा, लेकिन उसकी थकान बढ़ती जा रही थी।
एक दिन, गधा इतना थक गया कि वह चलने की स्थिति में भी नहीं था। उसे समझ में आ गया था कि दो मालिकों की सेवा करना बहुत कठिन है। वह खुद से सोचने लगा, “मैं एक ही मालिक के साथ इतना खुश था। अब दोनों मालिकों के बीच बंटकर मैं खुद को हर दिन अधिक थका हुआ और दुखी महसूस करता हूँ। यह कैसे ठीक हो सकता है?”
गधे ने अपनी समस्या हल करने के लिए सोचा कि वह एक दिन तालाब के किनारे आराम करेगा। वहां उसे अपनी चिंताओं से मुक्ति मिलेगी। जब वह तालाब के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि वहां एक मेंढ़क आराम से कूद-फांद कर रहा था। गधा उदास चेहरा लिए वहां बैठ गया। मेंढ़क ने गधे की उदासी को देखा और पूछा, “तुम इतने उदास क्यों हो, मित्र?”
गधे ने अपनी सारी कहानी मेंढ़क को सुनाई – कैसे वह दिन-रात दोनों मालिकों के बीच फंसा हुआ था, और दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करते-करते खुद को थका हुआ और दुखी महसूस करता था।
मेंढ़क ने गधे की बात ध्यान से सुनी और फिर बोला, “तुम्हारी समस्या यह है कि तुम दो मालिकों की सेवा कर रहे हो। जब तक तुम दोनों की सेवा करोगे, तब तक तुम्हें कभी भी शांति और आराम नहीं मिलेगा। किसी एक मालिक का चयन करो और उसी की पूरी निष्ठा से सेवा करो। एक साथ दो नावों में पैर रखने से तुम्हें केवल कष्ट ही मिलेगा।”
गधे ने मेंढ़क की बात पर गहराई से विचार किया। उसे समझ में आ गया कि वास्तव में उसकी समस्या यही है कि वह दो मालिकों के बीच बंटा हुआ है। उसने तुरंत फैसला लिया कि वह केवल एक मालिक का चयन करेगा, ताकि उसकी जिंदगी में शांति और संतुलन वापस आ सके।
अगले दिन गधा पहले मालिक के पास गया और उससे कहा, “मुझे माफ करना, लेकिन मैं अब दो मालिकों की सेवा नहीं कर सकता। मैं केवल तुम्हारी सेवा करूंगा, क्योंकि इससे मैं अपने काम में ज्यादा निष्ठा से जुट सकूंगा और मेरी थकान भी कम होगी।”
पहले मालिक ने गधे की बात को समझा और सहमति दे दी। उसने गधे से कहा, “तुम्हारा निर्णय सही है। मैं तुम्हारे ईमानदारी और मेहनत की हमेशा कद्र करता हूँ, और मुझे खुशी है कि तुमने सही रास्ता चुना है।”
इस प्रकार, गधा अब केवल एक मालिक की सेवा करने लगा। उसकी मेहनत और निष्ठा ने पहले मालिक को और भी खुश कर दिया। गधा भी अब अपने काम से संतुष्ट और खुश था, क्योंकि उसे शांति और आराम मिलने लगा था। उसने सीखा कि एक ही दिशा में निष्ठा और ध्यान देने से जीवन में संतुलन और सुख पाया जा सकता है।
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में हमें हमेशा सही प्राथमिकताएं चुननी चाहिए। एक साथ कई काम करने की कोशिश करने से हम अपने जीवन में संतुलन खो सकते हैं और हमेशा तनाव में रह सकते हैं। जब हम किसी एक चीज़ पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम उसे बेहतर ढंग से कर पाते हैं और जीवन में सुख और शांति प्राप्त कर सकते हैं।