गुणी कौआ और कुटिल गीदड़ | panchtantra ki kahaniyan

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गुणी कौआ और कुटिल गीदड़ की बैठक “गुणी कौआ और कुटिल गीदड़ जंगल में बातचीत करते हुए”

गुणी कौआ और कुटिल गीदड़

एक समय की बात है, एक घना और हरा-भरा जंगल था। इस जंगल में एक खूबसूरत और समझदार कौआ निवास करता था। यह कौआ अपनी सुंदरता और बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध था। उसकी काले और चमकदार पंख जंगल की शोभा बढ़ाते थे, और उसकी चतुराई के किस्से भी जंगल में मशहूर थे।

एक दिन, एक चालाक और कुटिल गीदड़, जो हमेशा दूसरों को अपने झूठे वचनों और चालाकियों से धोखा देने का प्रयास करता था, जंगल में आया। गीदड़ ने कौआ की खूबसूरती और बुद्धिमत्ता के बारे में सुना था और उसे अपने जाल में फंसाने का विचार किया।

गीदड़ ने कौआ के पास जाकर कहा, “मित्र कौआ, तुम तो जानदार हो, लेकिन मैंने सुना है कि तुमसे भी सुंदर और गुणवान कोई और जानवर है। क्या तुम मुझे उस जानवर के बारे में कुछ बता सकते हो?”

गीदड़ का छल और कौआ की समझदारी
“गीदड़ की चालाकी और कौआ की समझदारी का चित्रण”

कौआ ने कहा, “मुझे तो लगता है कि इस जंगल में सुंदरता और गुणों का कोई सानी नहीं है। लेकिन तुम जानना चाहते हो तो बताओ, कौन सा जानवर है जो मेरे से भी सुंदर और गुणवान है?”

गीदड़ ने मुस्कुराते हुए कहा, “जंगल के उत्तर में एक तालाब है, जहां एक चूहे के पास एक अद्भुत रत्न है। वह रत्न न केवल सुंदर है, बल्कि उसमें हर किसी की सुंदरता को और भी बढ़ाने की शक्ति है। अगर तुम्हें उस रत्न को प्राप्त करना है, तो तुम्हें उस चूहे से मिलना होगा।”

कौआ के मन में लालच आ गया, और उसने गीदड़ की बात मान ली। गीदड़ ने उसे सलाह दी कि वह चूहे के पास जाकर कहे कि वह गीदड़ का संदेश लेकर आया है और रत्न के बारे में जानकारी ले।

कौआ तालाब की ओर बढ़ा, जहां चूहा निवास करता था। चूहे ने कौआ को देखा और सोचा, “यह कौआ क्यों आया है? क्या वह भी गीदड़ की तरह चालाक तो नहीं है?”

कौआ ने चूहे से कहा, “मैं गीदड़ का संदेश लेकर आया हूँ। उसने कहा है कि तुम्हारे पास एक रत्न है जो सुंदरता को बढ़ा सकता है। मुझे वह रत्न चाहिए।”

चूहे ने हंसते हुए कहा, “वह रत्न तो तुमको चाहिए ही होगा। लेकिन इसके लिए तुम्हें एक कठिन काम करना होगा। तुम्हें मेरे घर में आग लगानी होगी, ताकि मैं तुम्हें रत्न दिखा सकूँ। आग लगाना कठिन काम है, लेकिन अगर तुममें हिम्मत है, तो तुम्हें यह काम करना होगा।”

कौआ ने सोचा कि यह एक साधारण काम होगा और उसने चूहे की बात मान ली। कौआ ने चूहे के घर में आग लगा दी, लेकिन जब आग लगी तो चूहा तुरंत बाहर निकल गया और कहा, “अब तुम रत्न प्राप्त करने के लायक हो। वह रत्न मेरे पास नहीं है, बल्कि गीदड़ के पास है। गीदड़ ने मुझसे कहा था कि मैं तुम्हें यह काम करने के लिए कहूँ, ताकि तुम्हें उसके धोखे का एहसास हो सके।”

अब कौआ को समझ में आ गया कि गीदड़ ने उसे धोखा दिया था। गीदड़ ने अपनी चालाकी से कौआ को फंसाया और खुद को लाभ पहुँचाया। कौआ ने गीदड़ के धोखे को समझा और सोचा कि अब उसे इस स्थिति से बाहर निकलने का उपाय खोजना होगा।

कौआ ने अपनी समझदारी का उपयोग किया और गीदड़ को खोज निकाला। उसने गीदड़ से कहा, “मैंने तुम्हारे धोखे को समझ लिया है। लेकिन अब मैं तुम्हें एक सबक सिखाऊँगा।” कौआ ने गीदड़ को जंगल के अन्य जानवरों के सामने पेश किया और बताया कि कैसे गीदड़ ने उसे धोखा दिया था।

सभी जानवरों ने गीदड़ की चालाकी को देखकर उसकी निंदा की और गीदड़ को जंगल से बाहर कर दिया। गीदड़ ने अपने कृत्यों के लिए पश्चाताप किया और उसने जंगल छोड़ दिया।

कौआ ने सीखा कि किसी के कहने पर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए किसी भी काम को नहीं करना चाहिए। साथ ही, उसने यह भी समझा कि सच्ची सुंदरता और गुण केवल बाहरी दिखावे में नहीं बल्कि हमारे आचरण और समझदारी में छिपे होते हैं।

इस प्रकार, कौआ ने अपनी समझदारी और साहस का उपयोग करके गीदड़ के धोखे से मुक्ति पाई और जंगल में शांति और सम्मान प्राप्त किया। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अपने आचरण और समझदारी से हम किसी भी धोखे या कठिनाई का सामना कर सकते हैं।

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